शहीद की पत्नी का ये FB पोस्ट हो रहा है वायरल ! जिसे देखकर आप…

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जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में सेना की एक यूनिट पर आतंकियों ने हमला किया था. हमले में भारतीय थलसेना के 31 वर्षीय जवान मेजर अक्षय गिरीश शहीद हुए थे. शहीद पति की याद में उनकी पत्नी ने एक भावुक पोस्ट लिखी है जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. पोस्ट में उन्होंने अपनी लव लाइफ से लेकर बुरे दिन तक की पूरी कहानी लिखी है. जब मुझे पहली बार प्रपोज.

आपकी जानकारी को बता दें कि मेजर अक्षय गिरीश की पत्नी ने यह पोस्ट फेसबुक पेज बीइंग यू पर शेयर की है. मेजर के परिवारीजन बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके के रहने वाले हैं. मेजर की एक चार साल की बेटी है. मेजर के पिता वायुसेना में पायलट रह चुके हैं.

यह बात साल 2009 की है. जब उन्होंने पहली बार मुझे प्रपोज किया था. मैं अपनी एक फ्रेंड के साथ चंडीगढ़ गयी हुई थी. हम वहां से शिमला भी गए, लेकिन वहां कर्फ्यू लगा हुआ था. हमने जो होटल बुक किया था वो भी जल्दी बंद हो गया था. वह अंगूठी भी लाना भूल गए थे जिसकी वजह से उन्होंने अपनी जेब में रखी लाल रंग की पेन देकर मुझे घुटनों के बल बैठकर प्रपोज किया. साल 2011 में हमारी शादी हो गयी और फिर हम पुणे में शिफ्ट हो गए. शादी के दो साल बाद बेटी नैना ने जन्म लिया

 इसके बाद अक्षय अपने प्रोफेशनल असाइनमेंट को लेकर लंबे समय के लिए चले गए. मेरी बेटी नैना उस समय छोटी थी तो ससुरालवालों ने सलाह दी कि तुम बेंगलुरु आ जाओ. लेकिन मैं वहां नहीं रुकी

साल 2016 में अक्षय की पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में हो गयी. हम भी वहां गए और ऑफिसर्स मेस में रुके. क्योंकि वहां घर अलॉट नहीं हुआ था

उसी साल 29 नवम्बर की सुबह 5.30 बजे गोलियां चलने की आवाज हुई और हम जाग गए.  पहले हमने सोचा कि ये ट्रेनिंग चल रही है, लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं था. कुछ ही देर बाद ग्रेनेड फूटने की आवाज आयी. इसके बाद 5.45 बजे एक जूनियर हमारे पास आया और अक्षय से बोला कि आतंकियों ने तोपखाने की रेजिमेंट को बंधक बना लिया है. उसने कहा उनसे लड़ने के लिए जल्दी से कपड़े बदलो

सभी बच्चों और महिलाओं को एक कमरे में रखा गया था और बहार संतरियों को तैनात किया गया था. हम लगातार फायरिंग की आवाज सुन रहे थे. मैंने अपनी सास को एक मैसेज भेजा. बेंगलुरु स्थित मेरी ननद और मेरे बीच एक बातचीत हो रही. जैसे ही सवेरा हुआ था तभी हम सबको एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. हम इस समय भी पजामा और चप्पलों में थे

दोपहर तक अक्षय की कोई खबर नहीं थी. इससे मुझे डर सताने लगा था. सुबह 11.30 बजे मैं खुद को रोक नहीं सकी और एक कॉल कराई

उनकी टीम के एक सदस्य ने फोन उठाया और कहा कि मेजर अक्षय एक अलग जगह पर गए हुए हैं. शाम को करीब 6.15 बजे उसके कमांडिंग और कुछ अन्य ऑफिसर्स मुझसे मिलने आये. उन्होंने कहा मैम हमने अक्षय को खो दिया है. वह सुबह करीब 8.30 बजे शहीद हो गए थे. यह सब सुनते ही मेरी तो दुनिया ही ढह गयी. मैं सोच रही थी कि काश ! मैंने उन्हें अलविदा कहकर गले लगाया होता. काश मैंने उनसे आखिरी कहा होता कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ. अब मैं बच्चे की तरह बहुत उदास हो गयी हूँ, जैसे मेरी रूह को मेरे शरीर से जुदा कर दिया हो. दो अन्य सैनिक भी शहीद हुए थे जिनकी वजह से बंधक बनी महिलाएं, बच्चे और पुरुषों को छुड़ाया गया

मुझे उनकी सारी चीजें मिल गयी. उनकी वर्दी, कपड़े जो हमने कई वर्षों तक सहेज कर रखी थी. मैंने उनका रेजिमेंट जैकेट अभी तक नहीं धोया है. जब भी मुझे उनकी याद आती है मैं वह जैकेट पहन लेती हूँ. जिसमें अभी भी अक्षय की खुशबू आती है